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डेबिट नोट कब बनाएँ
एक सवाल पूछें: क्या अब ग्राहक को ओरिजिनल इनवॉइस से ज़्यादा देना है? अगर हाँ, तो सप्लायर एक्स्ट्रा रकम और उसके GST का डेबिट नोट बनाता है। अगर ग्राहक को कम देना है, तो उसकी जगह क्रेडिट नोट बनता है।
उदाहरण
- गलती से कम रेट लगा: दूसरे राज्य के खरीदार को 100 यूनिट पर ₹500 की जगह ₹480 लगाया। डेबिट नोट: ₹2,000 + IGST 18% ₹360 = ₹2,360। वजह "रेट बढ़ाया (रेट का अंतर)"।
- गलत GST रेट: ₹50,000 पर 18% की जगह 5% लगाया। एक्स्ट्रा टैक्स ₹50,000 का 13% = ₹6,500। उस टैक्स का डेबिट नोट बनाएँ और वजह "टैक्स कम लगा था" चुनें; बुक्स में लाइन कैसे दिखानी है, अपने अकाउंटेंट से पूछें।
- इनवॉइस से ज़्यादा माल: 120 कार्टन गए, इनवॉइस में 100 लिखे हैं। इनवॉइस के रेट पर 20 एक्स्ट्रा कार्टन का डेबिट नोट, GST के साथ।
- बाद में तय चार्ज: इनवॉइस के बाद ग्राहक ₹1,500 भाड़ा देने को मान जाता है। मुख्य सप्लाई पर लगने वाले रेट से ₹1,500 + GST का डेबिट नोट (सप्लाई का हिस्सा वाला भाड़ा माल के रेट पर चलता है)।
कब डेबिट नोट सही तरीका नहीं है
- इनवॉइस अभी दिया ही नहीं: उसकी जगह इनवॉइस ही ठीक कर लें।
- एक नई, अलग बिक्री: नया टैक्स इनवॉइस बनाएँ, डेबिट नोट नहीं।
- देर से पेमेंट पर ब्याज: GST में यह एक नई सप्लाई है; ज़्यादातर बिज़नेस इसका टैक्स इनवॉइस बनाते हैं। अपने अकाउंटेंट से पूछें।
- ग्राहक को कम देना है (माल वापसी, रेट में कटौती, डिस्काउंट): क्रेडिट नोट बनाएँ।
खरीदार का "डेबिट नोट"
बहुत से खरीदार माल लौटाने या कम माल का दावा करने पर अपने सप्लायर को "डेबिट नोट" भेजते हैं। अकाउंट्स में यह आम और ठीक है: यह सप्लायर को बताता है कि "हम आपका देना घटा रहे हैं"। पर यह GST डेबिट नोट नहीं है। GST में टैक्स सिर्फ़ सप्लायर बदलता है, और माल वापसी पर इसका मतलब है कि सप्लायर क्रेडिट नोट बनाता है।
इसलिए अगर आप खरीदार हैं, तो "यह नोट किसके बदले है" में खरीद (सप्लायर) चुनकर यहाँ अपना डेबिट नोट बनाएँ। यह आपकी बुक्स में सप्लायर को आपका देना घटाता है और, लौटाए माल के लिए, उसे आपके स्टॉक से निकालता है। फिर सप्लायर से GST क्रेडिट नोट माँगें, वरना आपकी खरीद पर टैक्स नहीं बदलता। जब उनका क्रेडिट नोट आए, उसे दूसरे नोट की तरह फिर से दर्ज न करें: डेबिट नोट पहले से उसकी जगह है।